भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Thursday, May 28, 2026

१४५३. पानीयं प्राणिनां प्राणा विश्वमेव च तन्मयम् ।

१४५३. पानीयं प्राणिनां प्राणा विश्वमेव च तन्मयम् । 

नहि तोयाद्विना वृत्ति:स्वस्थस्य व्याधितस्य वा ॥


अर्थ :- प्राणीमात्र हे पाण्यावर अवलंबून असतात. हे जग पाणीमय आहे. माणूस आजारी असो किंवा तंदुरुस्त असो, पाण्याशिवाय जगू शकत नाही.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"सभी प्राणीमात्र पानी पर निर्भर हैं। यह संसार जलमय (पानी से परिपूर्ण) है। मनुष्य चाहे बीमार हो या तंदुरुस्त, वह पानी के बिना जीवित नहीं रह सकता।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"All living beings depend on water. This world is filled with and sustained by water. Whether a person is sick or healthy, they cannot survive without water."



Wednesday, May 27, 2026

१४५२. जलजा नवलक्षाश्च दशल‌क्षाश्च पक्षिण:।

१४५२. जलजा नवलक्षाश्च दशल‌क्षाश्च पक्षिण:।
कृमयो रुद्रलक्षाश्च विंशल्लक्षा गवादय:॥
स्थावरास्त्रिंशल्लक्षाश्च चतुर्लक्षाश्च मानवा:।
पापपुण्यं  समं कृत्वा नक्षयोनिषु जायते ॥

अर्थ :- 

(या जगात) 9 लाख जलचर आहेत, पक्ष्यांच्या दहा लाख,अकरा लाख किडे आहेत. वीस लाख गवे आहेत, तीस लाख झाडे आहेत आणि चार लाख माणसे आहेत. पाप आणि पुण्य जेव्हा समसमान होते तेव्हा मनुष्य जन्म मिळतो. 

८४ लक्ष योनींची गणना. 

Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

(इस संसार में) 9 लाख जलचर (पानी के जीव) हैं, पक्षियों की संख्या दस लाख है, ग्यारह लाख कीड़े-मकोड़े हैं। बीस लाख चौपाये (पशु/गवे) हैं, तीस लाख वृक्ष (पेड़-पौधे) हैं और चार लाख मनुष्य हैं। जब पाप और पुण्य समान होते हैं, तब मनुष्य का जन्म मिलता है।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

(In this world) there are 900,000 aquatic creatures, 1,000,000 types of birds, and 1,100,000 insects. There are 2,000,000 quadrupeds/cattle, 3,000,000 trees and plants, and 400,000 human forms. It is only when one's sins (demerits) and virtues (merits) become perfectly balanced that one is blessed with a human birth."


टीप / Note: यह सुभाषित प्रसिद्ध 'चौरासी लाख योनि' (84 Lakh Species/Life-forms) के चक्र को दर्शाता है, जहाँ कुल योग $9 + 10 + 11 + 20 + 30 + 4 = 84$ लाख होता है। 

Tuesday, May 26, 2026

१४५१. अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम् ।

१४५१. अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे  भोजनं विषम् । 
दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम् ॥

अर्थ :- 

नेहमी त्या शास्त्राचं वाचन(अभ्यास) केला नाही तर ते शास्त्र विषाप्रमाणे त्या व्यक्तीला नुसते अहंकार चिकटवून असेल. आधीच अजीर्ण झाले असेल तर जेवण हे विषाप्रमाणे आहे. जलशाला (सभेला) जाणे हे दरिद्र्याला विषप्राशना सारखं आहे. तरुणींबद्दल ओढ वाटणं हे म्हातारपणी विष प्राशन करण्या सारखे आहे.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"यदि नियमित रूप से उस शास्त्र का वाचन (अध्ययन) न किया जाए, तो वह शास्त्र विष के समान उस व्यक्ति को केवल अहंकार से जकड़ देता है। यदि पहले से ही अपच (अजीर्ण) हो, तो भोजन विष के समान होता है। किसी जलसे (सभा/गोष्ठी) में जाना एक दरिद्र (निर्धन) व्यक्ति के लिए विषपान करने जैसा है। और बुढ़ापे में युवतियों के प्रति आकर्षण (आसक्ति) होना विषपान करने के समान है।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"If one does not regularly read or study a scripture, that knowledge, like poison, merely clings to the person as pure ego. If one is already suffering from indigestion, food acts like poison. Attending a grand assembly or gathering is like drinking poison for a destitute person. Similarly, harboring a craving or longing for young women in old age is equivalent to consuming poison."

Monday, May 25, 2026

१४५०. त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् ।

१४५०. त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् । 

त्यजेत्क्रोधमयीं भार्यां नि: स्नेहान्बान्धवान् त्यजेत् ॥ 

आर्य चाणक्य


अर्थ :- निर्दयी धर्माचा त्याग करावा, ज्ञानहीन अशा गुरूला सोडून (ज्ञानी गुरू)  करावा. रागीट पत्नी सोडून द्यावी. ज्यांना माया नाही अशा नातेवाईकांचा पण त्याग करावा. 


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"निर्दयी धर्म का त्याग कर देना चाहिए, ज्ञानहीन गुरु को छोड़कर (ज्ञानी गुरु को) अपनाना चाहिए। क्रोधी पत्नी को छोड़ देना चाहिए और जिन रिश्तेदारों में कोई प्रेम (माया) या स्नेह न हो, उनका भी त्याग कर देना चाहिए।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"One should abandon a religion that lacks compassion, and leave an ignorant guru to seek a wise one. A short-tempered wife should be left behind, and those relatives who have no love or affection (Maya) for you should also be renounced."


Sunday, May 24, 2026

१४४९. मत्सम: पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि ।

१४४९. मत्सम: पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि । 

एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु ॥

शंकराचार्य


अर्थ :-  हे पार्वती देवी, माझ्या सारखा (अत्यंत) पापी माणूस भेटणार नाही आणि तुझ्या सारखी (अतिशय कनवाळू भक्तांच्या) पापांचे डोंगर नष्ट करणारी (देवी) पण मिळणार नाही. तर हे लक्षात घेऊन तू योग्य ते (माझ्या पापांचा नाश) करून टाक.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"हे पार्वती देवी! मेरे जैसा (अत्यंत) पापी मनुष्य तुम्हें कहीं नहीं मिलेगा और तुम्हारे जैसी (अतिशय दयालु, भक्तों के) पापों के पहाड़ को नष्ट करने वाली (देवी) भी कोई और नहीं मिलेगी। अतः इस बात को ध्यान में रखते हुए, तुम जो उचित हो वही (मेरे पापों का नाश) करो।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"O Goddess Parvati! You will never find a sinner as wretched as me, and I will never find anyone like you who is so compassionate and capable of destroying mountains of sins. Keeping this in mind, please do what is appropriate (and destroy my sins)."

Saturday, May 23, 2026

१४४८. जिह्वायाश्छेदनं नास्ति न तालुपतनाद्भयम् ।

१४४८. जिह्वायाश्छेदनं नास्ति न तालुपतनाद्भयम् । 

निर्विशेषेण वक्तव्यं निर्लज्ज: को न पण्डित:॥


अर्थ : - (वाट्टेल ते बोलल तरी) जीभ काही तुटत नाही, टाळू गळून पडत नाही. त्यामुळे (विचार न करता तोंडाला येईल ते) बोलत सुटाव.  (एकदा) लाज सोडली की सर्व जण ज्ञानीच आहेत.

हे विरोधी अर्थाने म्हटले आहे. कवीला अशा लोकांची निंदा करायची आहे.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

(चाहे जो भी बकवास की जाए) जीभ टूट नहीं जाती और न ही तालू गिर पड़ता है। इसलिए (बिना सोचे-समझे मुंह में जो आए) बस बोलते चले जाना चाहिए। (एक बार) यदि लाज (शर्म) छोड़ दी जाए, तो फिर हर कोई ज्ञानी ही है। यह विपरीत (व्यंग्यात्मक) अर्थ में कहा गया है। कवि ऐसे लोगों की निंदा (आलोचना) करना चाहते हैं।


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

(No matter what nonsense one speaks) the tongue does not break, nor does the palate fall off. Therefore, one should just keep blabbering (whatever comes to mind without thinking). Once a person casts off all shame, everyone becomes a wise pundit. This has been said ironically (in an opposite sense). The poet intends to censure/criticize such people.

Friday, May 22, 2026

१४४७. श्रुतिस्मृतिपुराणानामालयं करुणालयम्।

१४४७. श्रुतिस्मृतिपुराणानामालयं करुणालयम्।  

नमामि भगवत्पादं शङ्करं लोकशङ्करम् ॥


अर्थ :- 

वेदवाङ्मय, स्मृति ग्रंथ आणि सर्व पुराणे हे ज्यांच्या जिभेवर वास करतात अशा, दयेचा सागर असणाऱ्या, जगताचे भल करणाऱ्या देवस्वरूप अशा (आद्य ) शंकराचार्यांना मी नमस्कार करतो/ते.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"वेद-वांग्मय (वैदिक साहित्य), स्मृति ग्रंथ और सभी पुराण जिनकी जिह्वा पर वास करते हैं, जो दया के सागर हैं, और इस संपूर्ण जगत का कल्याण करने वाले देवस्वरूप हैं, उन (आद्य) शंकराचार्य जी को मैं प्रणाम करता/करती हूँ।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"I bow to the divine (Adi) Shankaracharya, on whose tongue reside the Vedic literature, the Smriti texts, and all the Puranas; who is an ocean of compassion, and who works for the welfare of the entire world."