भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Tuesday, August 11, 2026

१५१२. अथवा जायमानस्य यच्छीलमनुजायते ।

१५१२. अथवा जायमानस्य यच्छीलमनुजायते । 

श्रूयते तद् महाराज न अमृतस्यापसर्पति ॥

महाभारत


अर्थ :- 

जन्म होताना माणसांचा जो स्वभाव तयार होतो तो मरेपर्यंत बदलत नाही.मेल्यानंतरच त्यात बदल होतो. हे राजा, अशी वस्तुस्थिती आहे.


हिंदी अनुवाद

"जन्म लेते समय मनुष्य का जो स्वभाव बन जाता है, वह मृत्यु तक नहीं बदलता है। मरने के बाद ही उसमें परिवर्तन होता है। हे राजन, यही वस्तुस्थिति (वास्तविकता) है।"

English Translation

"The nature that is formed at the time of a person's birth does not change until death. It changes only after they die. O King, this is the reality."

Monday, August 10, 2026

१५११. दर्शनध्यानसंस्पर्शै: मत्स्यी कूर्मी च पक्षिणी ।

१५११. दर्शनध्यानसंस्पर्शै: मत्स्यी कूर्मी च पक्षिणी ।  

शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जनसंगति: ॥


अर्थ :- 

माशांची मादी (आपल्या संततीला फक्त) समोर ठेवते ‌(नजरे आड होऊ देत नाही.), कासवाची मादी नुसती मनात पिल्लांच्या संगोपन याबद्दल विचार करते, पक्षीण पिलांना स्पर्श करून सूचना देते. त्याप्रमाणे भली माणस सर्व प्रकारांनी आपल्या सोबत्यांची काळजी घेतात.


हिंदी अनुवाद

"मछली केवल अपनी संतान को अपने सामने (नज़रों के सामने) रखती है, कछुआ केवल अपने मन में बच्चों के पोषण का विचार करता है, और चिड़िया (पक्षी) अपने बच्चों को स्पर्श करके निर्देश देती है। ठीक उसी प्रकार, सज्जन (अच्छे) लोग हर तरह से अपने साथियों की देखभाल और रक्षा करते हैं।"

English Translation

"A fish cares for her offspring merely by keeping them before her eyes, a female tortoise nurtures her young ones simply through her thoughts, and a mother bird guides her chicks through touch. In the very same manner, noble people care for and protect their companions in every possible way."

Sunday, August 9, 2026

१५१०. प्राप्य प्रमाणपदवीं को नामास्ते तुलेsवलेपस्ते !

१५१०. प्राप्य प्रमाणपदवीं को नामास्ते तुलेsवलेपस्ते ! 

नयसि गरिष्ठमधस्तात्तदितरमुच्चैस्तरां कुरुषे ॥


अर्थ :- 

हे तुले (वजनकाटा)तू म्हणशील तेच खरं असा शिक्कामोर्तब झाल्यानंतर तुला एवढा गर्व का झालाय?  जो वजनदार असतो त्याला तू (मान द्यायचा सोडून) खाली ढकलतेस आणि जे (हलकं) असेल त्याला उंचीवर नेऊन ठेवतेस.


हिंदी अनुवाद

"हे तराजू (वजन काँटा)! जब यह पक्का हो ही चुका है कि तू जो कहेगा वही सच है, तो फिर तुझे इतना अहंकार क्यों हो गया है? जो (वजनदार) भारी होता है, उसे सम्मान देने के बजाय तू नीचे धकेल देता है, और जो (हल्का) होता है, उसे ऊँचा उठा देता है।"

English Translation

"O weighing scale! Once it has been firmly stamped that whatever you say is the ultimate truth, why have you become so arrogant? Instead of respecting that which is heavy (has substance), you push it down, and that which is light (lacks substance), you elevate to a higher position."

Saturday, August 8, 2026

१५०९. अक्षराणि परीक्ष्यन्तामम्बराडम्बरेण किम् ।

१५०९. अक्षराणि परीक्ष्यन्तामम्बराडम्बरेण किम् । 

शम्भुरम्बरहीनोsपि सर्वज्ञ: किं न जायते ?॥


अर्थ :-

( त्या माणसाला) असलेल्या ज्ञानाची परीक्षा घ्यावी. नुसत्याच कपड्यांच्या भपक्यांच्या काय बरं उपयोग? भगवान शंकर दिगंबर असला तरी तो सर्वज्ञानीच असतो.


हिंदी अनुवाद

"(उस व्यक्ति के) ज्ञान की परीक्षा लेनी चाहिए। केवल कपड़ों के दिखावे का क्या उपयोग? भगवान शिव यद्यपि दिगंबर (वस्त्रहीन) हैं, फिर भी वे सर्वज्ञ (सब कुछ जानने वाले) ही हैं।"

English Translation

"One should test the knowledge (of a person). What is the use of mere showy clothes? Even though Lord Shiva is Digambara (unclad/clad in space), He remains omniscient."

Thursday, August 6, 2026

१५०८. आदित्यमण्डलं वापि चन्द्रमण्डलमेव वा ।

१५०८. आदित्यमण्डलं वापि चन्द्रमण्डलमेव वा । 

स्वप्ने गृह्णाति‌ हस्ताभ्यां राज्यं संप्राप्नुयान्महत् ॥


अर्थ :- 

स्वप्नांचे अर्थ काय हे सांगणाऱ्या श्लोकांपैकी हा श्लोक आहे. 

जर ( व्यक्ति) दोन्ही हातांनी सूर्य किंवा चंद्र मण्डलाला हात लावतोय असं स्वप्नात दिसले तर त्याला राज्य प्राप्ती होते.


हिंदी अनुवाद

"यह श्लोक सपनों के अर्थ बताने वाले श्लोकों में से एक है— यदि स्वप्न में कोई (व्यक्ति) अपने दोनों हाथों से सूर्य या चंद्र मंडल का स्पर्श करता हुआ दिखाई दे, तो उसे राज्य की प्राप्ति होती है।"

English Translation

"This verse is among those that explain the meaning of dreams— If a person sees themselves touching the orb of the sun or the moon with both hands in a dream, they attain a kingdom (or power and sovereignty)."

Wednesday, August 5, 2026

१५०७. विद्यार्थी सेवक: पान्थ:क्षुधार्तो भयकातर:।

१५०७. विद्यार्थी सेवक: पान्थ:क्षुधार्तो भयकातर:। 

भाण्डारी प्रतिहारी च सप्त सुप्तान् प्रबोधयेत् ॥


अर्थ :-  कोणी झोपलेल असताना उठवणं हे पाप आहे असे म्हणतात . पण असं असलं तरी... विद्यार्थी, नोकर , वाटसरू, भुकेलेला, घाबरलेला, गोदाम व्यवस्थापक, निरोप्या हे सात जणांना उठवावे.


हिंदी अनुवाद:

ऐसा कहा जाता है कि सोए हुए व्यक्ति को जगाना पाप होता है। लेकिन फिर भी... विद्यार्थी, नौकर, यात्री (राहगीर), भूखा व्यक्ति, डरा हुआ व्यक्ति, गोदाम प्रबंधक (स्टोरकीपर) और संदेशवाहक—इन सात लोगों को सोए हुए होने पर भी जगा देना चाहिए।


English Translation:

It is said that waking up a sleeping person is a sin. Nevertheless... a student, a servant, a traveler, a hungry person, a frightened person, a storekeeper (warehouse manager), and a messenger—these seven people should be woken up.

Sunday, August 2, 2026

१५०६. भुक्तानि यैस्तव फलानि पचेलिमानि क्रोडस्थितैरहह वीतभयै: प्रसुप्तम् ।

१५०६. भुक्तानि यैस्तव फलानि पचेलिमानि क्रोडस्थितैरहह वीतभयै: प्रसुप्तम् ।

ते पक्षिणो जलरयेण विकृष्यमाणं पश्यन्ति पादप भवन्तममी तटस्था:॥


अर्थ :- 

एखाद्या दात्याच्या उदार स्वभाव आणि त्याचे दिवस फिरल्यावर त्याला गरिबी येते तेव्हा त्याचा फायदा घेणारे लोक काहीच मदत करत नाहीत त्या बद्दलची ही अन्योक्ती आहे.

हे वृक्षा, ज्या पाखरांनी तुझी चांगली पिकलेली फळे खाल्ली, तुझ्या फांद्यावर घरटी बांधून बेफिकीर झोपले तेच पाण्याच्या वेगामुळे तू फरफटत जात असताना तटस्थ(पणे, १. त्रयस्थपणे २. आता नवीन मिळालेल्या आधारावर ) बसून (गम्मत) बघत आहेत.


हिंदी अनुवाद

"हे वृक्ष! जिन पक्षियों ने तेरे पके हुए मीठे फल खाए और तेरी शाखाओं पर घोंसले बनाकर बेफ़िक्र होकर सोए, वही पक्षी आज पानी के तेज़ बहाव में तेरे बह जाने पर तटस्थ (उदासीन) होकर किनारे से (मज़ा) देख रहे हैं।"

(विशेष: यह अन्योक्ति ऐसे उदार दानवीर के लिए है, जिसका अच्छा समय बीत जाने पर और गरीबी आने पर वे ही लोग दूर हो जाते हैं जिन्होंने कभी उसके आश्रय और धन का आनंद लिया था।)

English Translation

"O Tree! The very birds that devoured your ripe fruits and slept carelessly in the nests built upon your branches are now sitting indifferently, watching you get swept away by the raging current of water."

(Note: This allegory refers to a generous giver who falls into poverty after his golden days pass, only to be abandoned by the very people who once benefited from his fortune and now silently watch his downfall.)