१४५०. त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् ।
त्यजेत्क्रोधमयीं भार्यां नि: स्नेहान्बान्धवान् त्यजेत् ॥
आर्य चाणक्य
अर्थ :- निर्दयी धर्माचा त्याग करावा, ज्ञानहीन अशा गुरूला सोडून (ज्ञानी गुरू) करावा. रागीट पत्नी सोडून द्यावी. ज्यांना माया नाही अशा नातेवाईकांचा पण त्याग करावा.
Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)
"निर्दयी धर्म का त्याग कर देना चाहिए, ज्ञानहीन गुरु को छोड़कर (ज्ञानी गुरु को) अपनाना चाहिए। क्रोधी पत्नी को छोड़ देना चाहिए और जिन रिश्तेदारों में कोई प्रेम (माया) या स्नेह न हो, उनका भी त्याग कर देना चाहिए।"
English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)
"One should abandon a religion that lacks compassion, and leave an ignorant guru to seek a wise one. A short-tempered wife should be left behind, and those relatives who have no love or affection (Maya) for you should also be renounced."