भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Sunday, June 7, 2026

१४६३. योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।

१४६३. योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।

योऽपाकरोत्तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥


अर्थ :-  ज्यांनी योगाच्या माध्यमातून चित्ताची (मनाची) शुद्धी केली, व्याकरण शास्त्राच्या (पदे) माध्यमातून वाणीतील दोष दूर केले आणि आयुर्वेद शास्त्राच्या (वैद्यक) माध्यमातून शरीरातील रोग/मल दूर केले, अशा मुनींमधील श्रेष्ठ असणाऱ्या पतंजली ऋषींना मी दोन्ही हात जोडून (करांजली जोडून) नमन करतो.


हिंदी अनुवाद 

"जिन्होंने योग के माध्यम से चित्त (मन) की अशुद्धियों को दूर किया, व्याकरण के माध्यम से वाणी के दोषों को मिटाया और आयुर्वेद (वैद्यकशास्त्र) के माध्यम से शरीर के रोगों को नष्ट किया, ऐसे मुनियों में श्रेष्ठ महर्षि पतंजलि को मैं हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।"

English Translation

"I bow with folded hands to Patanjali, the most exalted among the sages, who removed the impurities of the mind through Yoga, the defects of speech through Grammar, and the ailments of the body through Medicine (Ayurveda)."

Friday, June 5, 2026

१४६१. पीत्वा रसं तु कटुकं मधुरं समानं माधुर्यमेव जनयेन्मधुमक्षिकाsसौ ।

१४६१. पीत्वा रसं तु कटुकं मधुरं समानं माधुर्यमेव जनयेन्मधुमक्षिकाsसौ । 

सन्तस्तथैव समसज्जनदुर्जनानां श्रुत्वा वच: मधुरसूक्तरसं सृजन्ति॥


अर्थ : - 

ज्या प्रमाणे कडू किंवा गोड कुठलीही चवीचा पदार्थ प्यायला मिळाला तरी मधमाशी त्यापासून मधुर असाच (मध) निर्माण करते अगदी तसेच सज्जन माणूस दुष्ट किंवा सज्जन लोकांच्या (स्वभावाला अनुसरून ते जे काही बोलतील) त्या पासून चांगलाच अर्थ काढतो.


हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार मधुमक्खी को चाहे कड़वा पदार्थ पीने को मिले या मीठा, वह उससे मधुर शहद का ही निर्माण करती है; ठीक उसी प्रकार सज्जन व्यक्ति दुष्ट या सज्जन लोगों के (स्वभाव के अनुसार वे जो कुछ भी कहें) विचारों से केवल अच्छा और सकारात्मक अर्थ ही ग्रहण करते हैं।

English Translation

Just as a bee, whether it drinks something bitter or sweet, creates only sweet honey from it; in the exact same way, a noble person extracts only goodness and positive meaning from whatever people—whether wicked or virtuous—say according to their nature.

Thursday, June 4, 2026

१४६०. न राज्यं न राजासीन्न दण्डो न च दाण्डिकः ।

१४६०. न राज्यं न राजासीन्न दण्डो न च दाण्डिकः ।

धर्मेणैव प्रजाः सर्वा रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥


अर्थ :- 

हे मूळ संस्कृत सुभाषित महाभारतातील (शांतीपर्व) आहे.

त्या काळात (सत्ययुगात किंवा आदर्श समाजात) कोणतेही राज्य नव्हते आणि कोणीही राजा नव्हता; तसेच कोणालाही शिक्षा (दण्ड) नव्हती आणि शिक्षा देणारा कोणी अधिकारीही (दण्डिक) नव्हता. सर्व प्रजा केवळ 'धर्माच्या' (कर्तव्य आणि नैतिकतेच्या) पालनानेच एकमेकांचे रक्षण करत असत.

हे सुभाषित अशा एका आदर्श आणि प्रगल्भ समाजाचे वर्णन करते, जिथे लोकांमध्ये इतकी उच्च नैतिक मूल्ये आणि कायद्याचे पालन करण्याची स्वयंशिस्त होती की, समाज चालवण्यासाठी कोणत्याही राजाची, पोलिसांची किंवा शासन व्यवस्थेची गरज पडत नव्हती. लोक स्वतःच्या कर्तव्याची जाणीव ठेवून एकमेकांशी गुण्यागोविंदाने वागत असत.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"यह मूल संस्कृत सुभाषित महाभारत के (शांतिपर्व) से है।

उस काल में (सत्ययुग या आदर्श समाज में) न तो कोई राज्य था और न ही कोई राजा था; वैसे ही न तो किसी के लिए दंड (सजा) था और न ही दंड देने वाला कोई अधिकारी (शासक) था। सभी प्रजा केवल 'धर्म' (कर्तव्य और नैतिकता) का पालन करते हुए परस्पर (एक-दूसरे की) रक्षा करती थी।

यह सुभाषित एक ऐसे आदर्श और परिपक्व समाज का वर्णन करता है, जहाँ लोगों में इतने उच्च नैतिक मूल्य और कानून का पालन करने का आत्म-अनुशासन (स्वयंशिस्त) था कि समाज चलाने के लिए किसी राजा, पुलिस या शासन व्यवस्था की आवश्यकता ही नहीं पड़ती थी। लोग अपने कर्तव्य को समझते हुए आपस में मिल-जुलकर (प्रेमपूर्वक) रहते थे।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"This original Sanskrit subhashita (wise saying) is from the Mahabharata (Shanti Parva).

In that era (the golden age or an ideal society), there was neither a kingdom nor a king; likewise, there was no punishment (Danda) nor any authority (Dandika) to inflict punishment. All citizens protected each other solely through the practice of 'Dharma' (righteousness, duty, and morality).

This subhashita describes an ideal and evolved society, where people possessed such high moral values and self-discipline to follow rules that there was no need for a king, police, or governance system to run the society. Being mindful of their duties, people lived together in perfect harmony and goodwill."


Wednesday, June 3, 2026

१४५९. भ्रमन्सम्पूज्यते राजा भ्रमन्सम्पूज्यते द्विज:।

१४५९. भ्रमन्सम्पूज्यते राजा भ्रमन्सम्पूज्यते द्विज:। 

भ्रमन्सम्पूज्यते योगी , स्त्री भ्रमन्ती विनश्यति ॥


अर्थ:- फिरत राहून (सर्व गोष्टींवर लक्ष ठेवणारा) राजा, हिंडून हिंडून (ज्ञान मिळवणारा) ब्राह्मण, सर्व ठिकाणी राहून योग साधणारा योगी यांना मान  मिळतो. पण स्त्री जास्त भटकली तर तिच्या बद्दल वाईट बोलतात.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"घूमते रहकर (सभी बातों पर नजर रखने वाला) राजा, निरंतर भ्रमण कर (ज्ञान अर्जित करने वाला) ब्राह्मण, और विभिन्न स्थानों पर रहकर योग साधना करने वाला योगी—इन सभी को सम्मान मिलता है। परंतु, यदि कोई स्त्री अत्यधिक भटकती (भ्रमण करती) है, तो लोग उसके बारे में बुरा-भला कहते हैं।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"A king who travels around (to keep a watchful eye on his kingdom), a Brahmin who wanders (to acquire and spread knowledge), and a yogi who practices yoga by living in different places are all highly respected. However, if a woman wanders or roams around excessively, people speak ill of her."

Tuesday, June 2, 2026

१४५८. न वेत्ति यो यस्य गुणप्रकर्षं स तं सदा निन्दति नाsत्र चित्रम‌् ।

१४५८. न वेत्ति यो यस्य गुणप्रकर्षं  स तं सदा  निन्दति नाsत्र चित्रम‌् । 

यथा किराती करिकुम्भलग्नां मुक्तां परित्यज्य बिभर्ति गुञ्जाम् ॥


अर्थ :-  एखाद्या श्रेष्ठ व्यक्तीचे उत्तम गुण न कळल्याने (सामान्य माणूस त्याची सारखी निंदा करतो) यात काहीच नवल नाही. हत्तीच्या गंडस्थळावरचा (अमूल्य असा) मोती टाकून देऊन भिल्ल स्त्रीला जसं गुंजेची फळ (वेणीत) गुंफावीशी वाटतात तसंच (हे निंदा करणं) आहे.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"यदि किसी श्रेष्ठ व्यक्ति के उत्तम गुणों को न समझ पाने के कारण (कोई सामान्य मनुष्य लगातार उसकी निंदा करता है), तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यह ठीक वैसा ही है, जैसे कोई भील महिला हाथी के मस्तक से निकले (अमूल्य) गजमुक्ता (मोती) को फेंक कर, उसकी जगह गूंजे के फलों (चिरमिटी के दानों) को अपनी वेणी (बालों) में पिरोना पसंद करती है।"


English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

"It is not at all surprising if an ordinary person constantly criticizes a great individual because they fail to understand their noble qualities. It is just like a tribal (Bhilla) woman who throws away the priceless pearl obtained from an elephant's forehead, choosing instead to weave cheap gunja seeds (rosary peas) into her hair."