भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Tuesday, July 14, 2026

१४९३. विषदिग्धस्य बाणस्य दन्तस्य चलितस्य च ।

१४९३. विषदिग्धस्य बाणस्य दन्तस्य चलितस्य च । 

अमात्यस्य च दुष्टस्य मूलादुद्धरणं सुखम् ॥


अर्थ :- विषारी बाण, हलायला लागलेला दात आणि दुष्ट मंत्री या सर्व गोष्टींच अगदी मु‌ळापासून उच्चाटन केले पाहिजे.(वर वर उपाय केल्यास दुप्पट त्रास होईल.)


हिंदी अनुवाद

विषैला बाण, हिलता हुआ दाँत और दुष्ट मंत्री—इन सभी चीज़ों का जड़ से ही उन्मूलन (नाश) कर देना चाहिए। (क्योंकि केवल ऊपर-ऊपर से उपाय करने पर इनसे दुगना कष्ट होगा।)

 

English Translation

A poisoned arrow, a loose tooth, and a wicked minister—all of these must be eradicated completely from their very roots. (For applying superficial remedies will only cause double the pain.)

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