भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Saturday, May 16, 2026

१४४१. अन्नपूर्णे , सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।

१४४१. अन्नपूर्णे , सदापूर्णे  शङ्करप्राणवल्लभे । 

ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं  भिक्षां मे देहि पार्वति ॥


अर्थ :- महादेवाला प्राणां प्रमाणे प्रिय असणाऱ्या, परिपूर्ण असणाऱ्या, अन्नपूर्णा अशा हे देवी पार्वती, मला वैराग्य आणि ज्ञान प्राप्त होण्यासाठी (ज्ञानाची) भिक्षा घाल.


Hindi Translation

"हे देवी पार्वती! जो महादेव को प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं, जो सर्वगुण संपन्न (परिपूर्ण) हैं, और जो साक्षात अन्नपूर्णा हैं; मुझे ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति के लिए (ज्ञान की) भिक्षा दीजिए।"


English Translation

"O Goddess Parvati, who is dearer than life itself to Lord Mahadev, who is perfect and complete, and who is Goddess Annapurna (the bestower of nourishment); please grant me the alms of knowledge, so that I may attain wisdom and detachment (Vairagya)."

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