भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Thursday, August 6, 2026

१५०८. आदित्यमण्डलं वापि चन्द्रमण्डलमेव वा ।

१५०८. आदित्यमण्डलं वापि चन्द्रमण्डलमेव वा । 

स्वप्ने गृह्णाति‌ हस्ताभ्यां राज्यं संप्राप्नुयान्महत् ॥


अर्थ :- 

स्वप्नांचे अर्थ काय हे सांगणाऱ्या श्लोकांपैकी हा श्लोक आहे. 

जर ( व्यक्ति) दोन्ही हातांनी सूर्य किंवा चंद्र मण्डलाला हात लावतोय असं स्वप्नात दिसले तर त्याला राज्य प्राप्ती होते.


हिंदी अनुवाद

"यह श्लोक सपनों के अर्थ बताने वाले श्लोकों में से एक है— यदि स्वप्न में कोई (व्यक्ति) अपने दोनों हाथों से सूर्य या चंद्र मंडल का स्पर्श करता हुआ दिखाई दे, तो उसे राज्य की प्राप्ति होती है।"

English Translation

"This verse is among those that explain the meaning of dreams— If a person sees themselves touching the orb of the sun or the moon with both hands in a dream, they attain a kingdom (or power and sovereignty)."

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