भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Sunday, May 17, 2026

१४४२. उल्लङ्घ्य सिन्धोः सलिलं सलीलं यः शोकवह्निं जनकात्मजायाः ।

 १४४२. उल्लङ्घ्य सिन्धोः सलिलं सलीलं यः शोकवह्निं जनकात्मजायाः । 

आदाय तेनैव ददाह लङ्कां नमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम् ॥ 

 || श्रीहनुमते नमः ||


अर्थ :- ज्याने समुद्राचे पाणी लीलया पार करून, 

जनककन्या सीतेचा शोकरुपी अग्नी घेऊन, 

त्यानेच (त्याच अग्नीने) लंका जाळली, 

त्या अञ्जनीपुत्र हनुमंताला मी हात जोडून नमस्कार करतो.


Hindi Translation

"जिन्होंने समुद्र के पानी को खेल-खेल में (सहजता से) पार कर लिया, और जनक-पुत्री माता सीता के शोक रूपी अग्नि को लेकर उसी अग्नि से लंका को जला दिया; उन अंजनी-पुत्र हनुमान जी को मैं हाथ जोड़कर नमस्कार करता हूँ।"


English Translation

"Salutations with folded hands to Hanuman, the son of Anjani, who effortlessly crossed the ocean's waters, took the fire of sorrow from Janaka's daughter (Sita), and burned down Lanka with that very same fire."

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