भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Thursday, May 21, 2026

१४४६. अग्निशेषं ऋणशेषं शत्रुशेषं तथैव च ।

१४४६. अग्निशेषं ऋणशेषं शत्रुशेषं तथैव च ।

पुनः पुनः प्रवर्धन्ते तस्माच्छेषं न कारयेत् ॥


अर्थ :- 

आग (विझवल्या नंतर)जर थोडीशी ज्वाळा राहिली असेल तर, तसेच कर्ज थोडं उरले किंवा शत्रूचा एखादा माणूस शिल्लक राहिला तर या गोष्टी पुन्हा पुन्हा खूप उग्र रूप धारण करतात म्हणून या समूळ नष्ट कराव्यात.


Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)

"यदि आग बुझाने के बाद भी उसकी थोड़ी सी चिंगारी (ज्वाला) बची रह जाए, वैसे ही यदि थोड़ा सा कर्ज बाकी रह जाए, या दुश्मन का कोई एक भी आदमी जीवित बच जाए, तो ये चीजें बार-बार बहुत उग्र रूप धारण कर लेती हैं। इसलिए इन्हें जड़ से नष्ट कर देना चाहिए।"


English Translation

"If a small spark remains after extinguishing a fire, or if a small amount of debt is left unpaid, or if even a single person from the enemy's side survives, these things tend to resurface and take a highly fierce form time and again. Therefore, they must be completely eradicated."



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