भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Wednesday, August 26, 2026

१५१४. अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |

१५१४. अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् |

तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥


अर्थ :- 

सर्व भूतमात्रांना व्यापून शिल्लक उरणाऱ्या परब्रह्माचे जो दर्शन घडवतो अशा सद्-गुरूला माझा नमस्कार असो.


हिन्दी भाषांतर  

जो समस्त भूत-प्राणियों (जीवों) में व्याप्त होकर भी उनसे परे (शेष) रहने वाले परब्रह्म का दर्शन कराता है, ऐसे सद्गुरु को मेरा नमस्कार है।


English Translation 

Salutations to that True Guru who enables the realization of the Supreme Being (Parabrahma), who pervades all living beings and yet transcends them all.

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