भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Thursday, July 23, 2026

१४९८. बोधयन्ति न याचन्ते भिक्षाद्वारा गृहे गृहे।

१४९८. बोधयन्ति न याचन्ते भिक्षाद्वारा गृहे गृहे। 

दीयतां दीयतां नित्यमदातु: फलमीदृशम्॥


अर्थ :- (लोकांच्या) दाराशी उभे राहून भीक मागणारे (खर तर) भीक मागत नसतात तर देणाऱ्यांना असं लक्षात आणून देतात की नक्की दान द्या, दान न करणाऱ्याची अवस्था आमच्या सारखी होते.

हिंदी अनुवाद

(लोगों के) द्वार पर खड़े होकर भीख माँगने वाले (दरअसल) भीिक नहीं माँग रहे होते, बल्कि देने वालों को यह याद दिलाते हैं कि दान ज़रूर दें, दान न करने वालों की हालत हमारे जैसी हो जाती है।

English Translation

Those who stand at (people's) doorsteps begging are not (actually) asking for alms; rather, they serve as a reminder to the givers to surely practice charity, for those who do not give may end up in a condition like theirs.

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