१४४७. श्रुतिस्मृतिपुराणानामालयं करुणालयम्।
नमामि भगवत्पादं शङ्करं लोकशङ्करम् ॥
अर्थ :-
वेदवाङ्मय, स्मृति ग्रंथ आणि सर्व पुराणे हे ज्यांच्या जिभेवर वास करतात अशा, दयेचा सागर असणाऱ्या, जगताचे भल करणाऱ्या देवस्वरूप अशा (आद्य ) शंकराचार्यांना मी नमस्कार करतो/ते.
Hindi Translation (हिंदी अनुवाद)
"वेद-वांग्मय (वैदिक साहित्य), स्मृति ग्रंथ और सभी पुराण जिनकी जिह्वा पर वास करते हैं, जो दया के सागर हैं, और इस संपूर्ण जगत का कल्याण करने वाले देवस्वरूप हैं, उन (आद्य) शंकराचार्य जी को मैं प्रणाम करता/करती हूँ।"
English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)
"I bow to the divine (Adi) Shankaracharya, on whose tongue reside the Vedic literature, the Smriti texts, and all the Puranas; who is an ocean of compassion, and who works for the welfare of the entire world."
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