भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Wednesday, July 15, 2026

१४९४. न देवाय न धर्माय न बन्धुभ्य:न चार्थिने ।

१४९४. न देवाय न धर्माय न बन्धुभ्य:न चार्थिने । 

कृपणस्यार्जितं वित्तं ह्रीयते खलु तस्करै:॥


अर्थ :- कंजूस माणसाची संपत्ती नातेवाईक, गरजू लोक, देव धर्म यांच्यासाठी उपयुक्त ठरत नाही. कंजूस माणसाने  मिळवलेले धन चोर चोरून नेतात.


हिंदी अनुवाद

कंजूस व्यक्ति की संपत्ति रिश्तेदारों, जरूरतमंद लोगों या भगवान और धर्म के काम नहीं आती। कंजूस इंसान द्वारा कमाया गया धन चोर चुराकर ले जाते हैं।

English Translation

The wealth of a miser is of no use to relatives, the needy, or for divine and religious purposes. The money accumulated by a miser is ultimately stolen away by thieves.

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