१४७३. केतक्य: कण्टकैर्व्याप्ता: नलिन्य: या: पङ्कसंभवा:।
विलासिन्य: सगर्वाश्च क्व रत्नमनुपद्रवम्॥
अर्थ : खूप गुण जिथे असतात तिथे कुठला तरी दोष असतो च संपूर्ण निष्कलंक वस्तू सापडत नाही असे कवि सांगतोय.
केवडा (खूप सुगंध देतो खरा) पण त्याच्या भोवती काटे असतात,कमळ चिखलात उगवते.सुंदर स्त्रिया गर्विष्ठ असतात.कुठल रत्न निर्दोष आहे? कोणतही नाही.
हिंदी अनुवाद
केतकी के पौधे कांटों से घिरे होते हैं, कमलिनी (कमल का पौधा) कीचड़ से पैदा होती है, और सुंदर (विलासप्रिय) स्त्रियां गर्व (अभिमान) से युक्त होती हैं; फिर इस संसार में ऐसा कौन सा रत्न है, जो किसी उपद्रव (कष्ट, दोष या बाधा) से रहित हो?
भावार्थ: इस संसार में कोई भी मूल्यवान या सुंदर वस्तु पूरी तरह से निर्दोष नहीं है। हर अच्छी चीज़ के साथ कोई न कोई कमी या कठिनाई जुड़ी होती है।
English Translation
The Ketaki (screw-pine) bushes are surrounded by thorns, the lotuses grow out of mud, and beautiful, luxurious women are full of pride; where indeed is that gemstone which is completely free from any blemish, trouble, or disturbance?
Meaning: There is nothing in this world that is absolutely perfect or without flaws. Every beautiful or valuable thing comes with its own set of disadvantages or difficulties.
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