भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Saturday, July 18, 2026

१४९७. अश्वप्लुतं वासवगर्जितं च स्त्रीणां च चित्तं, पुरुषस्य भाग्यम् ।

१४९७. अश्वप्लुतं वासवगर्जितं च स्त्रीणां च चित्तं, पुरुषस्य भाग्यम् । 

अवर्षणं चाप्यतिवर्षणं च, देवो न जानाति कुतो मनुष्य:॥


अर्थ :- पुढील गोष्टी केव्हा घडतील त्याबद्दल  देव सुद्धा सांगू शकत नाही तर माणूस कसा बरे सांगू शकेल? घोडा केव्हा उधळेल , ढगांचा केव्हा गडगडाट होईल, बाईच्या मनात काय आहे, नशीब माणसाला कोठे नेऊन ठेवेल, दुष्काळ आणि अति प्रमाणात पाऊस.


हिंदी अनुवाद

इन बातों के बारे में कि ये कब घटित होंगी, स्वयं भगवान भी नहीं बता सकते, तो फिर मनुष्य भला कैसे बता सकता है?— घोड़ा कब बिदक (उधड़) जाएगा, बादलों की गर्जना कब होगी, स्त्री के मन में क्या चल रहा है, भाग्य मनुष्य को कहाँ ले जाएगा, और कब अकाल या अत्यधिक वर्षा (अतिवृष्टि) होगी।

English Translation

Even God cannot predict when the following things will happen, so how can a mere human tell?— When a horse will bolt, when the clouds will thunder, what is on a woman's mind, where destiny will take a person, and when a drought or excessive rainfall will occur.

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