भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाण भारती।
तस्यां हि काव्यं मधुरं तस्मादपि सुभाषितम्॥

Wednesday, July 29, 2026

१५०३. श्रिया गेहे मयाsरण्ये रामस्त्यक्त: त्वया पथि।

१५०३. श्रिया गेहे मयाsरण्ये रामस्त्यक्त: त्वया पथि।
बत मुद्रे ! पुरन्ध्रीणां प्रत्यय:क: करिष्यति॥

अर्थ :- 

आपली ओळख सीतेला पटावी म्हणून हनुमानाने रामाची अंगठी दिल्यानंतर केव्हा तरी त्या अंगठीला उद्देशून सीतामाई म्हणते,
अग मुद्रिके, रामाला (स्त्री असणाऱ्या मी रानात सोडून दिले, राजश्री ( अयोध्येच राजवैभव) नी घरातच रामाचा त्याग केला, आणि तू आता त्याला सोडून दिलेस.(या सर्व गोष्टी स्त्रीलिंगी अ‌सल्यामुळे , बायका केंव्हाही सोडून देतात असं दिसल्या मुळे) स्त्रियांवर कोण बरे विश्वास ठेवेल?

हिंदी अनुवाद

अपनी पहचान सीता जी को कराने के लिए जब हनुमान जी ने श्रीराम की अंगूठी दी, तब किसी क्षण उस मुद्रिका (अंगूठी) को संबोधित करते हुए सीता माता कहती हैं:

 

'हे मुद्रिके! एक स्त्री होने के नाते मैंने तो राम को वन में (अकेला) छोड़ दिया, राजश्री (अयोध्या के राज-वैभव) ने उन्हें घर में ही त्याग दिया, और अब तूने भी उन्हें छोड़ दिया। (चूँकि ये तीनों ही शब्द स्त्रीलिंग हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि स्त्रियाँ कभी भी छोड़ देती हैं) भला स्त्रियों पर कौन विश्वास करेगा?

English Translation

After Hanuman gave Rama's ring to Sita so she would recognize him, Sita, addressing that ring at some point, says:

 

'O Ring! Being a woman myself, I left Rama in the forest; Rajashri (the royal majesty of Ayodhya) abandoned Him right at home; and now you too have deserted Him. (Since all three—Sita, Rajashri, and Mudrika—are grammatically feminine nouns, suggesting that women can walk away at any time) Who, indeed, would ever put their trust in women?

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